राहुल गांधी की अगुवाई में विपक्ष के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात की और वोट चोरी तथा वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) को लेकर चिंता ज़ाहिर की। हालांकि, बीजेपी ने राहुल के बयान पर पलटवार किया है।
शुक्रवार (9 अक्टूबर, 2026) को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों के एक समूह ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च किया। दस नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाक़ात की और वोट चोरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति ने उनकी चिंताओं को माना है; हालांकि, बीजेपी ने इसका खंडन करते हुए कहा कि राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं।
राष्ट्रपति से मुलाक़ात के बाद राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्होंने विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों को खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने उनसे इन आरोपों के सबूत देने को कहा है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप भी लगाया। ये विपक्ष के आरोप हैं जिनकी अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
**बीजेपी का राहुल गांधी पर पलटवार**
राहुल गांधी के बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने उन पर निशाना साधा। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत को अपने राजनीतिक नज़रिए से पेश कर रहे हैं। उनके दावों को गलत बताते हुए बीजेपी ने कहा कि राष्ट्रपति के पद को राजनीतिक विवादों में नहीं घसीटा जाना चाहिए।
**विपक्ष की मुख्य मांगें क्या हैं?**
विपक्षी नेताओं ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) को लेकर सवाल उठाए। उनकी मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा और वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों की समीक्षा शामिल है। विपक्ष का दावा है कि बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से लोगों के वोट देने के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं और नाम हटाने के कारणों को लेकर विवाद बना हुआ है।
**मार्च में शामिल विपक्षी नेता**
मार्च से पहले, विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद के सेंट्रल हॉल में बैठक की। इसके बाद, नेताओं ने राष्ट्रपति भवन की ओर जाने का फ़ैसला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति से मिलने के लिए अंदर जाने की इजाज़त दी गई, जबकि बाकी नेताओं ने बाहर विरोध प्रदर्शन किया। चुनाव आयोग के कामकाज पर चिंता जताते हुए विपक्ष ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा।