सबसे ज़्यादा निलंबन मध्य प्रदेश में हुए हैं, जहाँ 60 लोगों को निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों के बाद की गई है।
इंडियन यूथ कांग्रेस ने सात राज्यों में 200 से ज़्यादा पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इन लोगों पर आरोप है कि वे 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'INDIA' गठबंधन द्वारा आयोजित 'वोट बचाओ, देश बचाओ' मेगा-रैली में शामिल नहीं हुए थे। सूत्रों के अनुसार, संगठन ने गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, मध्य प्रदेश और झारखंड के पदाधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई की है।
निलंबन: मध्य प्रदेश में 60 और झारखंड में 32
कुल 202 पदाधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है: गुजरात में 49, पश्चिम बंगाल में 26, उत्तर प्रदेश (मध्य) में 11, तेलंगाना में 14, हरियाणा में 10, मध्य प्रदेश में 60 और झारखंड में 32।
रैली के प्रति उदासीनता
निलंबित पदाधिकारियों में वे नेता शामिल हैं जो अपने-अपने राज्यों की यूथ कांग्रेस इकाइयों में उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव जैसे पदों पर हैं। सूत्रों ने बताया कि ये लोग रैली के प्रति अपनी उदासीनता के लिए कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए, जिसके चलते यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
अन्य राज्यों में भी हो सकती है कार्रवाई
सूत्रों का कहना है कि अन्य राज्यों के पदाधिकारियों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जारी एक बयान में, मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस ने पुष्टि की कि यह कदम इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों का पालन करते हुए उठाया गया है।
अनुशासन बनाए रखने के लिए की गई कार्रवाई
बयान के अनुसार, 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित 'वोट चोरी के खिलाफ' (Anti-Vote Theft) रैली में इन लोगों की अनुपस्थिति संगठन के अनुशासन को तोड़ने जैसा है। इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए, संबंधित पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, और अब अगले आदेशों का इंतज़ार है। मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस ने कहा कि यह कार्रवाई संगठन में अनुशासन बनाए रखने और राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। गौरतलब है कि 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने एक बड़ी रैली की। इस रैली की अध्यक्षता राहुल गांधी ने की। असल में, राहुल गांधी के कहने पर ही 1 नवंबर को यह रैली आयोजित की गई थी, जिसका मुख्य मुद्दा 'वोट की चोरी' था।