मां तुझे प्रणाम कार्यक्रम में सीएम बोले भोपाल । मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा जब मेरी बेटियां मुझसे मिलती हैं वो सबसे खुशी का पल होता है। लाड़ली लक्ष्मी योजना ने बेटियों की जिंदगी को बदल कर रख दिया है। एक समय था जब मां की इच्छा होती थी की बेटा ही हो। पहले बेटी को बोझ और बेटे को कुल दीपक समझा जाता था, लेकिन आज ऐसा नहीं है। हर क्षेत्र में बेटियां कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। उन्होंने यह बात रवींद्र भवन में आयोजित मां तुझे प्रणाम कार्यक्रम में कहीं।
मां तुझे प्रणाम योजना के तहत मप्र की 120 लाड़ली लक्ष्मी बेटियां बाघा-हुसैनी वाला बार्डर की अनुभव यात्रा करने जाएंगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रवीन्द्र भवन से लाड़ली लक्ष्मियों को रवाना किया। ये बेटियां दादर-अमृतसर एक्सप्रेस से रवाना होंगी। इस मौके पर खेल और युवा कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया भी उपस्थित थीं। कार्यक्रम के दौरान लाड़ली लक्ष्मी उत्सव पुस्तिका का विमोचन किया गया।
बेटियों से मिलना सबसे ज्यादा खुशी का पल कार्यक्रम में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने पूछा-बताओ मेरे लिए सबसे ज्यादा खुशी का पल कौन सा होता है? जब मेरी बेटियां मुझसे मिलती है। किताब में छपे एक फोटो को दिखाते हुए सीएम ने कहा तुम बेटियां जब छोटी छोटी थी तो हो सकता है, तब मैंने किसी को गोद में लेकर उछाला हो। मेरे लिए सबसे सुंदर वही पल होता है जब मैं अपनी बेटियों को गोद में लेकर दुलार करता हूं।
एक योजना ने बेटियों की जिंदगी बदल दी है और समाज का दृष्टिकोण बदलने का काम किया है। एक जमाना था जब मां की इच्छा होती थी कि घर में पैदा हो तो सिर्फ बेटा ही पैदा हो। ज्यादातर ऐसा होता था। बेटा मतलब कुल का दीपक, बुढ़ापे की लाठी का सहारा। बेटी मतलब बोझ, यह चीज मन को बहुत तकलीफ देती थी कि बेटा-बेटी में भेद क्यों? फिर मेरे मन में यह विचार आया कि बेटियों को वरदान बनाना है, अभी खेलो इंडिया का बहुत सुंदर आयोजन किया। देखकर मन गदगद हो गया। हर क्षेत्र में बेटियां नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। बेटियां कम नहीं है, बेटियां बेटों से चार कदम आगे हैं। मेरे मन में विचार आया कि बेटी पैदा हो तो लखपति पैदा हो तो माता-पिता भ सोचेंगे के आने दो बेटी को। उसके बाद लाड़ली लक्ष्मी योजना बनाई गई।
पिछले साल हुआ था फैसला इस अनुभव यात्रा में जाने वाली लाड़ली लक्ष्मियां बाघा-हुसैनी वाला बार्डर (अमृतसर पंजाब), स्वर्ण मंदिर, जलियांवाला बाग और रामतीर्थ का भ्रमण करेंगी। पिछले साल यह फैसला किया गया था कि प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी बेटियां भी मां तुझे प्रणाम योजना का हिस्सा बनेगी। साल 2022 में 200 लाड़ली लक्ष्मी बेटियों ने बाघा बार्डर की यात्रा की थी।
ये है माँ तुझे प्रणाम योजना मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेश के युवाओं में देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति जागृति लाने, राष्ट्र के प्रति समर्पण, साहस की भावना जाग्रत करने एवं युवाओं को सेना तथा अद्र्ध सैनिक बलों के प्रति आकर्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 2013 में मां तुझे प्रणाम योजना शुरु की गई थी। अब तक 14 हजार 293 युवाओं को भ्रमण पर भेजा गया, जिसमें 7 हजार 779 युवक और 6 हजार 514 युवतियां शामिल है। इन्हें लेह-लद्दाख, कारगिल, आर.एस. पुरा (जम्मू-कश्मीर), बाघा-हुसैनीवाला बार्डर (अमृतसर, पंजाब), तनोत माता का मंदिर-लोंगेवॉल (राजस्थान), बीकानेर (राजस्थान), बाडमेर (राजस्थान), कोच्चि (केरल), नाथूला-दर्रा (सिक्किम), तुरा (मेघालय), पेंद्रा-पोल (पश्चिम बंगाल), जय गाँव (पश्चिम बंगाल), अण्डमान-निकोबार और कन्याकुमारी (तमिलनाडु) का भम्रण करवाया गया था।
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