मप्र समेत चार राज्यों में चुनाव की सौंपी जिम्मेदारी भोपाल। मप्र विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा और कांग्रेस सत्ता के लिए पेंच लड़ा रहे हैं, वहीं अन्य पार्टियां भी अपनी जमीन तलाश रही हैं या मजबूत कर रही हैं। इन्हीं में से एक पार्टी है बसपा। इस बार बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ा दांव खेला है। उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद को चार राज्यों की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। मायावती ने आकाश को मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के आगामी चुनाव की जिम्मेदारी दी है।
चार राज्यों की चुनावी जिम्मेदारी मिलने के बाद आकाश आनंद ने अपने ट्वीट में जो लिखा, उसे बसपा की नई सोशल इंजीनियरिंग का संकेत माना जा रहा है। आकाश आनंद ने कहा कि हम दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों का हर स्तर पर हो रहे शोषण, गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दों पर आने वाले विधानसभा चुनावों में मैदान में उतरेंगे।
आकाश बसपा के नेशनल कोर्डिनेटर हैं। आकाश आनंद मप्र में अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत चंबल अंचल से कर रहे हैं। वे 5 जुलाई को मुरैना जिले के सबलगढ़ में पार्टी कार्यकर्ताओं की सभा को संबोधित करेंगे। बसपा के प्रदेश प्रभारी रामजी गौतम भी उनके साथ रहेंगे। आकाश आनंद का कहना है कि हम दलितों, आदिवासियों तथा अन्य पिछड़े वर्गों का हर स्तर पर हो रहे शोषण, गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दों पर आने वाले विधानसभा चुनावों में लड़ेंगे।
बहुजन मिशन और आंदोलन हम लोगों का कर्तव्य है, और जिस विश्वास के साथ मुझे इस मिशन की जिम्मेदारी दी गई है मैं शीर्ष नेतृत्व और सभी कार्यकर्ताओं के उसी विश्वास को कायम रखूंगा। आकाश आनंद में मायावती के राजनीतिक वारिस की छवि देखी जाती है। ऐसे में उनको चार चुनावी राज्यों की जिम्मेदारी मिलना नहीं चौंकाता, लेकिन सियासी गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा जरूर शुरू हो गई है कि क्या आकाश आनंद चार ऐसे राज्यों की जिम्मेदारी के साथ न्याय कर पाएंगे, जहां एक ही साथ विधानसभा चुनाव होने हैं? क्या आकाश की संगठनात्मक क्षमता इतनी है? बसपा से जुड़े लोग आकाश की संगठन क्षमता और नेतृत्व पर भरोसा व्यक्त कर रहे हैं, चमत्कार की आस व्यक्त कर रहे हैं।
मप्र में पार्टी का मजबूत आधार मप्र में बसपा का मजबूत आधार माना जाता है। पार्टी हर चुनाव में मजबूत मौजूदगी दर्ज कराती रही है। मध्य प्रदेश चुनाव के आंकड़े देखें तो कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधे मुकाबले वाले राज्य में अगर किसी दल ने एक निश्चित वोट शेयर के साथ हर चुनाव में मौजूदगी दर्ज कराई है तो वह बसपा है। साल 2003 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 7.26 फीसदी वोट शेयर के साथ दो, 2008 में 8.97 फीसदी वोट शेयर के साथ सात और 2013 में 6.29 फीसदी वोट शेयर के साथ चार सीटें जीतें में सफल रही थी।
2018 के चुनाव में बसपा का वोट शेयर और सीटें, दोनों कम हुए, बसपा को 5.1 फीसदी वोट के साथ दो सीटों पर जीत मिली थी। आकाश आनंद के सियासी सफर पर नजर डालें तो वे साल 2017 में राजनीति में आए। मायावती ने 2017 में एक बड़ी रैली कर आकाश आनंद को राजनीति में लॉन्च किया था। यूपी में आकाश की लॉन्चिंग के बाद बसपा लगातार कमजोर हुई है। 2017, 2019 में पार्टी को बड़ी हार मिली, तो वहीं 2022 के यूपी चुनाव में तो बसपा महज -एक सीट पर सिमट गई।
बसपा के प्रदर्शन में आई बड़ी गिरावट के बाद आकाश आनंद से किसी चमत्कार की आस बेमानी होगी। मप्र बसपा अध्यक्ष रमाकांत पिप्पल का कहना है कि आकाश आनंद पाटी के नेशनल कोर्डिनेटर हैं। वे मप्र प्रभारी रामजी गौतम के साथ चुनाव की कमान संभालेंगे। वे 5 मई को मुरैना जिले के सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में जनसभा करेंगे। निश्चित ही उनकी सक्रियता से पार्टी को चुनाव में फायदा मिलेगा।
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