नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में 10 जनवरी की रात पुलिस को सूचना मिली कि फ्लाईओवर के नीचे एक लाश पड़ी हुई है। वारदात पर पुलिस की टीम पहुंचती है, लेकिन मरने वाले के बारे में कोई ज्यादा जानकारी मिल नहीं पाती। इसके बाद पुलिस ने उसकी तस्वीर खींची और पोस्टमार्टम से पहले भेजने से पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से उसकी तस्वीर बनाई जाती है। तस्वीर को ऐसा बनाया जाता है, जिसमें यह दिखे ही वह व्यक्ति अभी भी जिंदा है, क्योंकि मृत लोगों की तस्वीर पर लोग ध्यान नहीं देते हैं। इसके बाद दिल्ली पुलिस इस शख्स की फोटो के साथ पोस्टर जारी करती है और कहा गया कि जिसको भी इसके बारे में जानकारी हो, वह तुरंत नजदीक के पुलिस स्टेशन में बताए।

10 जनवरी को पुलिस को लाश मिलती है और 11-12 जनवरी को एआई की मदद से उसकी तस्वीर बनाई जाती है। यही नहीं 30 पुलिसवालों की टीम अलग-अलग जिलों और स्थानों में इस शख्स के बारे में जानकारी इकट्ठा करने में लग जाते हैं। 48 घंटे के अंदर पुलिस का प्रयास रंग लाया और छावला पुलिस स्टेशन में एक फोन कॉल आता है। फोन करने वाला कहता है कि आपने तो तस्वीर लगाई है, वह मेरा है और उसका नाम हितेंद्र है। पुलिस उस शख्स को तुरंत बुलाती है।

अब तक हितेंद्र की पोस्टमार्टम रिपोट आ चुकी थी, जिसमें पता चला था कि उसे गला घोंटकर मारा गया है। अब पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुट जाती है तो पता लगता है कि हितेंद्र की कुछ चार-पांच दोस्त हैं, जिनके नाम जेम्स, रॉकी, एनी और विपिन हैं। पुलिस ने शुरुआती जांच में पता लगाया कि हितेंद्र की महिला मित्र रूबी थी और वह शादीशुदा थी। इसके चार दोस्तों में से जेम्स चाहता था कि रूबी से उसकी दोस्ती हो, लेकिन वह उससे बातचीत नहीं कर रही थी। ऐसे में जेम्स चाहता था कि हितेंद्र रूबी से उसकी बातचीत करवा दे। एक दिन जेम्स ने हितेंद्र से कहा कि मैंने अपने घर पर पार्टी रखी है और तुम भी आओ। हितेंद्र पार्टी करने के लिए जेम्स के घर पर जाता भी है और वहां पर शराब की पार्टी शुरू हो जाती है। तभी जेम्स रूबी के पति को फोन लगाकर एक सोफे के आसपास छुपा देता है, जिसके बाद दारू के नशे में हितेंद्र ने रूबी के लिए कुछ अपशब्द कहे। यह बात रूबी के पति को सही नहीं लगी, क्योंकि उसको दोनों की दोस्ती के बारे में तो पता था, लेकिन हितेंद्र जो कुछ कह रहा था वह उसको अच्छी नहीं लगी।
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जेम्स ने यह सब करके हितेंद्र को रूबी के पति के सामने बदनाम कर दिया, लेकिन उसको यहां तक चैन नहीं आया और उसके दोस्तों ने महिला मित्र एनी के साथ मिलकर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद विपिन को हितेंद्र की लाश को ठिकाने लगाने का काम सौंपा जाता है। जेम्स कहता है कि उसके फोन को किसी सुनसान जगह पर फेंक दिया जाए और लाश को नदी या कहीं ऐसी जगह पर डाला जाए, जहां पर कोई आता नहीं हो। वहीं विपिन लाश को लेकर अपनी कैब में लेकर जाता है और फिर उसे फ्लाइओवर के नीचे फेंक देता है। यह पूरा वाक्या 9 जनवरी 2024 का होता है और इसके 24 घंटे के बाद पुलिस को हितेंद्र की लाश मिल जाती है। दो दिन की मशक्कत के बाद एआई की मदद से उसकी आंखों को खोलकर पोस्टर रिलीज किए जाते हैं और फिर उसकी पहचान भी हो जाती है। हालांकि मामला यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि कहानी यहां से शुरू होती है।