-20243 मिलियन यूनिट सरप्लस फिर भी आम उपभोक्ता पर महंगी बिजली का बोझ
भोपाल । प्रदेश के पास इस समय सरप्लस पॉवर है। 118120 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, खपत 97877 मिलियन यूनिट की होती है। इस तरह 20243 मिलियन यूनिट बिजली ज्यादा है। बावजूद इसके आम आदमी व उद्योग-व्यापार के लिए में बिजली की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव है। इतना ही नहीं, कारोबारियों को तो पीक अवर में 20 फीसदी सरचार्ज भी देना होगा। रात्रि में भी राहत नहीं है।आपत्तिकर्ता संगठनों का कहना है, कंपनियों ने सरप्लस में से 6085 मिलियन यूनिट बेचने या अतिरिक्त खपत का प्लान बनाया है। शेष 14158 मिलियन यूनिट के प्रबंधन की योजना नहीं है, जबकि इसके उपयोग या अन्य राज्यों को बेचकर कमाई की जा सकती है। इसका लाभ निम्न व उच्च दाब व घरेलू उपभोक्ताओं को भी दिया जा सकता है। इसके बावजूद 4 फीसदी रेट बढ़ाने का प्रस्ताव दे दिया गया है।
6085 मिलियन यूनिट बेचने का प्लान, 14 हजार का उत्पादन करेंगे बंद
प्रदेश में तीनों बिजली कंपनियों ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दरें बढ़ाने के लिए याचिका प्रस्तुत की है। आयोग ने 22 जनवरी तक इस पर आपत्ति-सुझाव बुलाए थे। याचिका में दिए गए तथ्यों के आधार पर उपभोक्ताओं की जेब पर डाले जा रहे बोझ का इंदौर, खरगोन, देवास के 20 से ज्यादा औद्योगिक, कोल्ड स्टोरेज व व्यापारिक संगठनों ने विरोध किया है। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के गौतम कोठारी, एआईएमपी के योगेश मेहता, एआरआर विशेषज्ञ आरसी सोमानी, आरएस गोयल व अन्य का कहना है कि जब सरप्लस बिजली है तो इसे बेचकर उपभोक्ताओं को पीक अवर में राहत क्यों नहीं दी जा रही है? एआरआर के प्रस्तावों से महंगी बिजली का बोझ महंगाई बढ़ाएगा। कारोबारी और उद्योगों को महंगी बिजली मिलेगी तो उत्पादन और ऑपरेशन खर्च बढ़ेगा।
1329 करोड़ की कमाई भी शामिल करें
कंपनियों के अनुसार 6085 मिलियन यूनिट्स 4.89 रुपए प्रति यूनिट दर पर बेचकर 1329 करोड़ रुपए की कमाई होगी। आपत्तिकर्ताओं का कहना है, इससे कंपनियों को हो रहे राजस्व घाटे की भरपाई होगी। इसे उसमें शामिल किया जाए, जिससे बढ़ोतरी की दरें कम हो सकेंगी और उपभोक्ता को राहत मिलेगी।
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उत्पादन कॉस्ट पर भी विचार होना चाहिए
कंपनियों ने पीक ऑवर का निर्धारण भी ऐसा किया, जिसमें कारोबारी अधिकतम बिजली का उपयोग करते हैं। सुबह व शाम 6 से 9 बजे तक ही बिजली की अधिकतम खपत उद्योगों में होती है। इसका बोझ आम आदमी पर आएगा। इसका आकलन करें। फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट करके बिजली की दरों का हर महीने आकलन होता है। अंतर अधिक होने पर आनुपातिक दरें बढ़ा दी जाती हैं। ऐसे में उत्पादन कॉस्ट पर भी विचार होना चाहिए।