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कुछ प्रावधानों के चलते चुनावी साल के बजट को कहा जाता है अंतरिम बजट
नई दिल्ली। चुनावी साल में सरकार अंतरिम बजट पेश करती है। चुनाव के बाद आने वाली नई सरकार को ही पूरे वित्त वर्ष के लिए बजट पेश करने का अधिकार होता है। अंतरिम बजट में नई सरकार के गठन और फिर उसकी ओर से बजट पारित किए जाने तक खर्च की अनुमति होती है। इस बजट में नई सरकार के बजट आने तक खर्च और आय का ब्योरा दिया जाता है। यह नए बजट के आने तक के लिए एक अस्थायी प्रावधान होता है। इसी के चलते इसे अंतरिम बजट कहा जाता है। बता दें कि 2019 के आम चुनाव से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट नहीं पेश कर पाए थे। उनके स्थान पर पीयूष गोयल ने बजट पेश किया था क्योंकि अरुण जेटली का स्वास्थ्य खराब था।
अंतरिम बजट में सरकार का खर्च, राजस्व, राजकोषीय घाटा, वित्तीय प्रदर्शन और अगले कुछ महीनों का अनुमान जारी होता है। वहीं पूर्ण बजट में पूरे वित्त वर्ष का ही लेखा-जोखा पेश किया जाता है। चुनावी वर्ष में पूर्ण बजट नहीं आता है। चुनाव खत्म होने के बाद नई सरकार बजट लेकर आती है। गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार अपना छठा लोकसभा बजट पेश करने जा रही हैं। अब तक सरकार की ओर से कुछ कहा नहीं गया है
, लेकिन माना जा रहा है कि पीएम किसान सम्मान निधि और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के बजट में इजाफा किया जा सकता है।
बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज देश का अंतरिम बजट पेश करने जा रही है। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले कुछ महीनों की आय और व्यय की जानकारी वित्त मंत्री इस बजट के जरिए देंगी। इसके अलावा कुछ जरूरी स्कीमों के बारे में भी इसमें जानकारी दी जा सकती है। हर साल सरकार बजट पेश करती है, फिर यह अंतरिम बजट क्या होता है। यह अहम सवाल है क्योंकि हर साल सरकार का पूर्ण बजट आता है, जो पूरे वित्त वर्ष के लिए होता है। लेकिन जिस साल लोकसभा चुनाव होने होते हैं, उस वर्ष कुछ महीनों के लिए अंतरिम बजट ही आता है।
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