- बहुमत सा‎बित करने से पहले ही चंपई सोरेन के खिलाफ ​बगावत

बहुमत सा‎बित करने से पहले ही चंपई सोरेन के खिलाफ ​बगावत

-झामुमो विधायकों में पड़ी फूट, सरकार पर छाए ‎सियासी संकट के बादल
रांची। झारखंड में चंपई सोरने सरकार पर ‎सियासी संकट के बादल छाने लगे है। बहुमत सा‎बित करने से पहले ही मुक्ति मोर्चा में फूट पड़ती हुई नजर आ रही है। झारखंड का झगड़ा अब और आगे बढ़ गया है। बता दें ‎कि चंपई सोरेन ने शुक्रवार को 12वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ भी ले ली लेकिन अब उन्हें अपने ही विधायकों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले ही झारखंड मुक्ति मोर्चा में फूट पड़ती हुई नजर आ रही है

Jharkhand Politics: फ्लोर टेस्ट से पहले बढ़ी चंपई की चिंता, शपथ के साथ ही  JMM में बगावत! रिजॉर्ट पॉलिटिक्स शुरू





 विधायकों को हॉर्सट्रेडिंग से बचाने के लिए हैदराबाद तो भेज दिया गया है लेकिन रांची में बैठकर विधायक अब बगावत पर उतर आए हैं। पूर्व सीएम हेमंत सोरन के जेल जाने के बाद से ही झारखंड में सियासत अपने चरम पर पहुंच गई है। चंपई सोरेन ने सीएम के रूप में शपथ लेते ही विधायकों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अब झारखंड सरकार पर एक बार फिर से संकट मंडराता दिखाई दे रहा है। अब चंपई सोरेन के सामने ऐसी स्थिति में बहुमत साबित करना टेढ़ी खीर सा‎बित हो रहा है। बता दें ‎कि उनके फिलहाल 39 विधायक हैदराबाद में बिरयानी खा रहे हैं।

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मामले की बात करें तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने सीएम चंपई सोरेन का विरोध करते हुए यह कहा कि शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन संथाल परगना से जीत कर गए थे और सीएम बने पर अब कोल्हान से जीते हुए चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है। क्या संथाल परगना में आदिवासी नेता नही हैं? खुशी होती कि संथाल मुख्यमंत्री होता, पर इन्होंने दुखी किया। वहीं लोबिन हेम्ब्रम ने सत्यानंद भोक्ता को मंत्री पद देने का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि बाहरी झामुमो पर कब्जा कर रहे हैं। वह बोरिया से विधायक हैं और यहीं क्षेत्र में यह बयान उन्होंने दिया। इसके बाद से वह पार्टी आलाकमान की पहुंच से दूर हो गए हैं। 
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इस तरह से यहां पर एक बार फिर से पार्टी में हलचल मच गई है। हेम्ब्रम ने यह भी कहा कि जब वोट डालना होगा तब देखा जाएगा। इससे जा‎हिर है ‎कि बहुमत सा‎बित करने के दौरान चंपई को मुंह की खानी पड़ सकती है। हालां‎कि भाजपा झारखंड में चल रहे इस नाटक पर पूरी तरह से नजर बनाए हुए हैं। संथाल वर्सेज अन्य आदिवासी की शुरू हुई यह लड़ाई अब नया रूख ले सकती है, इस‎लिए भाजपा अपना हाथ आदिवासियों के बीच में डालकर उन्हें नाराज नहीं करना चाहती है। भाजपा ‎फिलहाल तो ऐसे में देखो और इंतजार करो की नीति अपना रही है।
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