नई दिल्ली । दिल्ली में आप विधायकों को करोड़ों रुपए का ऑफर देकर तोड़ने की कोशिश के मामले में रविवार को आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर कई आरोप लगाये हैं। दिल्ली की कैबिनेट मंत्री आतिशी ने कहा कि भाजपा के जिन लोगों ने 2019 में कर्नाटक-मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिराकर भाजपा की सरकार बनवाई, उन्होंने ही दिल्ली में हमारे विधायक से संपर्क कर पैसे का ऑफर दिया। उन्होंने कहा कि क्राइम ब्रांच की नोटिस में आईपीसी, सीआरपीसी, पीएमएलए या प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं का कोई जिक्र नहीं है। आतिशी ने कहा कि हमें यह देखकर बहुत दुख होता है कि भाजपा ने दिल्ली पुलिस की छवि को खराब कर दिया है। आज अपराधी भी सोचते होंगे कि इन पुलिसवालों से क्या डरना? वहीं आप के वरिष्ठ नेता जस्मिन शाह ने कहा कि हर साल दिल्ली में क्राइम केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी है कि वो इसे रोके, लेकिन वो भाजपा कार्यालय से एक कॉल आते ही सीएम आवास पर पहुंच जा रही है। आतिशी ने कहा कि आम आदमी पार्टी के विधायकों को ऑफर देने वाले वही लोग हैं,
जिन्होंने 2016 में उत्तराखंड में कांग्रेस के 9 विधायकों को तोड़कर बीजेपी में शामिल कराया था। जिन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा था, उन्होंने ही दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायकों से संपर्क किया था। गोवा में जुलाई 2019 में जब कांग्रेस के 17 विधायक जीतकर आए थे और उनके 14 विधायक कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में चले गए, जो लोग कांग्रेस के उन 14 विधायकों के पास गए थे। वही लोग आम आदमी पार्टी के विधायकों के पास भी आए। कर्नाटक में 2019 में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार बनी और एचडी कुमार स्वामी मुख्यमंत्री बने। जुलाई 2019 में कांग्रेस और जेडीएस के 17 विधायक टूटकर भारतीय जनता पार्टी में चले गए। उन्होंने बताया कि जो लोग कांग्रेस के उन 17 विधायकों को तोड़ने और धमकी देने आए थे।
वही लोग आम आदमी पार्टी के विधायकों के पास आए। मध्य प्रदेश में 2020 में कांग्रेस की सरकार थी और कमलनाथ मुख्यमंत्री थे। उस दौरान 22 कांग्रेस के विधायक टूटकर पार्टी को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में चले गए, जो लोग कांग्रेस के उन विधायकों को तोड़ने और खरीदने आए थे, वही लोग आम आदमी पार्टी के विधायकों के पास आए। आतिशी ने बताया कि हाल ही में पूरे देश ने देखा कि नवंबर 2019 में महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने, लेकिन 21 जून 2022 को शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे 11 विधायकों के साथ मुंबई से सूरत चले गए और शिवसेना छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार बना ली। जो लोग एकनाथ शिंदे के साथ 11 विधायकों को तोड़ने आए थे, वही लोग आम आदमी पार्टी के विधायकों को तोड़ने आए थे।
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