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इस बार सीएम केजरीवाल और एलजी के आमने-सामने होने की ये है वजह
नई दिल्ली । दिल्ली के सरकारी अस्पतालों को लेकर एलजी वी के सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रविवार को आमने सामने आ गए। पहले एलजी सक्सेना ने पत्र जारी कर सरकारी अस्पतालों की बदतर दशा को लेकर सीएम का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने इस बात पर चिंता और नाराजगी व्यक्त की कि अदालत की टिप्पणी के बाद भी अस्पतालों की दशा नहीं सुधारी जा रही है। इसका जवाब देते हुए सीएम केजरीवाल ने इसके लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों की दशा सुधारने के लिए आपसे भी सहयोग के लिए कहा गया था
, मगर वह नहीं मिल रहा है। केजरीवाल ने कहा कि प्रधान वित्त सचिव के पद से एसी वर्मा और स्वास्थ्य सचिव के पद से एसबी दीपक कुमार को तुरंत हटाने के लिए कहा गया था, मगर वह नहीं किया गया है। एलजी सक्सेना ने सीएम केजरीवाल को लिखे पत्र में अस्पतालों को लेकर मीडिया रिपोर्टों का भी संदर्भ दिया है। सक्सेना ने अपने पत्र में कहा कि मैं स्वास्थ्य विभाग के तहत अस्पतालों की दयनीय स्थिति के संबंध में अपनी गहरी निराशा और चिंता व्यक्त करते हुए लिख रहा हूं। उन्होंने कहा कि भले ही आप और आपके मंत्रियों द्वारा लगातार अस्पताल बेहतर होने के बड़े-बड़े दावे किए गए हों पर हाल की मीडिया रिपोर्टों में दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की निराशाजनक स्थिति पर दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा की गई तीखी टिप्पणियों से पर्दा उठ रहा है।
सक्सेना ने कहा कि ऐसा लगता है कि बदहाली गहरी जड़ें जमा चुकी है। एलजी ने कहा कि दिल्ली के अस्पताल अच्छे होने ही चाहिए, मगर यहां की व्यवस्थाएं शिथिलता और उपेक्षा से ग्रस्त हैं। उन्होंने कहा कि ये सरकार के मौलिक कर्तव्यों का प्रत्यक्ष उल्लंघन हैं और इससे देश की राजधानी की बदनामी होती है। एलजी ने सरकार के प्रमुख अस्पतालों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की स्थिति पर जल्द से जल्द एक तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।इसके साथ ही कहा है कि आपके पास पर्याप्त धन, संसाधन और डॉक्टर उपलब्ध हैं।ऐसे में निष्क्रियता और विफलताओं और उसके लिए बहाना खोजने की बहुत कम गुंजाइश बचती है। उधर केजरीवाल ने एलजी को लिखे पत्र में कहा कि मुझे दिल्ली में बिगड़ते स्वास्थ्य ढांचे के संबंध में आपका तीन फरवरी का पत्र प्राप्त हुआ है
इस पर मैंने स्वास्थ्य मंत्री से रिपोर्ट मांगी है। मगर इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैंने आपको स्वास्थ्य सचिव को बदलने के लिए पहले भी लिखा है। स्वास्थ्य सचिव दीपक कुमार न सिर्फ अक्षम हैं बल्कि अपने मंत्री के मौखिक और लिखित आदेशों की खुलेआम अवहेलना करते हैं, उन्होंने सवाल उठाया कि एक निर्वाचित सरकार कैसे कार्य कर सकती है यदि उस विभाग का सबसे वरिष्ठ अधिकारी अपने मंत्री के आदेशों का पालन करने से इनकार कर दे? इसी प्रकार प्रधान वित्त सचिव आशीष वर्मा ने पूर्व में दवाइओं, लैब टेस्ट, डॉक्टर्स के वेतन, फरिश्ते योजना आदि का भुगतान रोक दिया था, जिससे पूरी स्वास्थ्य प्रणाली ठप हो गई थी। सीएम ने कहा कि मैंने पहले भी कई बार आपसे निजी मुलाकातों में और लिखित तौर पर वित्त सचिव को बदलने का अनुरोध किया है।
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