- जीतन राम मांझी ने अरविंद केजरीवाल पर हमला करते हुए कहा, "सबूत कमजोर थे, इसलिए उन्हें बरी कर दिया गया।"

जीतन राम मांझी ने अरविंद केजरीवाल पर हमला करते हुए कहा,

गया में जीतन राम मांझी ने अरविंद केजरीवाल पर हमला करते हुए कहा कि सबूतों की कमी की वजह से उन्हें बरी कर दिया गया। अगर NDA चाहता तो उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जाता। मांझी के इस बयान से राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

गया में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला किया। मांझी ने कहा कि केजरीवाल को सबूतों की कमी की वजह से बरी किया गया और मामला साफ नहीं था।

उन्होंने NDA सरकार और न्यायपालिका के खिलाफ भी कड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर NDA सच में चाहता तो केजरीवाल को जेल से रिहा नहीं किया जाता। उनके इस बयान से राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है और विपक्षी पार्टियों में हलचल मच गई है।


 सबूतों की कमी की वजह से केजरीवाल बरी हुए - जीतन राम मांझी
शनिवार (28 फरवरी) को गया में केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया थी। उन्होंने कहा कि केजरीवाल पर आरोप लगे, चार्जशीट दाखिल हुई और कई तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई। वह जेल भी गए और केस की सुनवाई भी हुई। सबूतों की कमी की वजह से उन्हें बरी कर दिया गया। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन पर लगे आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद थे या उन्हें जानबूझकर फंसाया गया था।

मांझी ने आगे कहा कि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भारत सरकार का शुक्रिया अदा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र की NDA सरकार चाहती तो वे जेल में रह सकते थे और रिहा नहीं होते। उन्होंने दावा किया कि NDA सरकार न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा बनाए रख रही है।

राज्यसभा सीट पर नाराजगी से किया इनकार
राज्यसभा सीट के सवाल पर मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी में कोई नाराजगी नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें पहले भरोसा दिलाया गया था कि उनकी पार्टी को दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट दी जाएगी। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने एक सीट जीती, जिसे उन्होंने जीता और वे केंद्रीय मंत्री बन गए। उन्होंने कहा कि उन्हें सीट मिली या नहीं, यह अलग बात है। लेकिन वादे को "पक्का" बताया गया। इसलिए वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।

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