- **'PoK में लोग भारी दमन का सामना कर रहे हैं; UN अधिकारियों को उस इलाके का दौरा करना चाहिए': फारूक अब्दुल्ला की अपील**

**'PoK में लोग भारी दमन का सामना कर रहे हैं; UN अधिकारियों को उस इलाके का दौरा करना चाहिए': फारूक अब्दुल्ला की अपील**

फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों को पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) का दौरा करके वहाँ के हालात का खुद जायज़ा लेना चाहिए, ताकि दुनिया को वहाँ की स्थितियों के बारे में पता चल सके। PoK में हाल ही में लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के लोग बहुत ज़्यादा दमन का सामना कर रहे हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से भी इस इलाके का दौरा करने की अपील की है। जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी पार्टी 'नेशनल कॉन्फ्रेंस' के अध्यक्ष ने कहा कि यह इलाका अभी मुश्किल हालात से गुज़र रहा है। "वहाँ बहुत ज़्यादा दमन हो रहा है। कई लोगों की जान जा चुकी है। हमारे पास वहाँ हो रही घटनाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं है।"

फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने कहा, "मैं संयुक्त राष्ट्र से अपील करता हूँ कि वह उस इलाके का दौरा करे और देखे कि लोग किन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, ताकि हमें और पूरी दुनिया को पता चल सके कि वे किस तरह की तकलीफ़ें झेल रहे हैं।" "इसीलिए मैं UN से वहाँ जाकर जाँच करने का आग्रह कर रहा हूँ।"

**PoK में विरोध-प्रदर्शन का चौथा दिन**
पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में चार दिनों से विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए गोलीबारी की गई, जिसमें अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच, रावलकोट से मुज़फ़्फ़राबाद तक कैंडललाइट मार्च निकाला गया। हालात को देखते हुए इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 27 लोगों की मौत हुई है और 200 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं।

**बेहतर प्रशासन और आर्थिक राहत की माँग**
PoK में 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' नाम के एक नागरिक संगठन के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँगों में बेहतर प्रशासन, आर्थिक राहत और राजनीतिक अधिकार शामिल हैं। पाकिस्तानी प्रशासन ने 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' पर प्रतिबंध लगा दिया, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। 7-8 जून को रावलकोट में हिंसक झड़पें हुईं, जिसके बाद पुलिस और रेंजर्स ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। रिपोर्टों के अनुसार, 11 से ज़्यादा लोग मारे गए और 200 से ज़्यादा घायल हुए। मुज़फ़्फ़राबाद और अन्य इलाकों में विरोध-प्रदर्शनों में लगभग 1,50,000 लोगों ने हिस्सा लिया है। ये विरोध-प्रदर्शन शुरू में बिजली, सड़कों, रोज़गार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे स्थानीय मुद्दों पर शुरू हुए थे, लेकिन अब ये पाकिस्तान के ख़िलाफ़ व्यापक नाराज़गी में बदल गए हैं।

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