यह याचिका वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दायर की है। इसमें FIR दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान की कथित चोरी का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की अगुवाई में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने तुरंत FIR दर्ज करने और कानूनी कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया है कि वह CBI की अगुवाई वाली SIT को एक तय समय-सीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करने का निर्देश दे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दान के फंड में कोई हेराफेरी, गबन या भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं।
**दो वकीलों द्वारा दायर याचिका**
यह याचिका वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दायर की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट को एक मज़बूत रेगुलेटरी, सुपरवाइजरी और ऑडिट सिस्टम बनाने का निर्देश दे, जो जनता और लाखों श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखे।
**"बिना FIR के जांच शुरू"**
याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई मौजूदा SIT ने बिना FIR या औपचारिक आपराधिक मामला दर्ज किए ही जांच शुरू कर दी है। इसमें तर्क दिया गया है कि प्रशासनिक अधिकारियों वाली SIT में जटिल वित्तीय और आपराधिक मामलों को संभालने के लिए ज़रूरी विशेष योग्यता की कमी हो सकती है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जांच किसी ऐसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए जिसके पास जटिल वित्तीय घोटालों से निपटने के लिए ज़रूरी विशेषज्ञता, संसाधन और संस्थागत तंत्र हों, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
याचिका में कहा गया है, "श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े गायब फंड और अन्य कथित अनियमितताओं की रिपोर्ट सच हों या न हों, ऐसी रिपोर्टों ने उन पीढ़ियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है जिन्होंने अयोध्या की महिमा को बहाल करने के लिए संघर्ष किया था।