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पहले हिंदुओं के लिए एक समान संहिता लागू की जानी चाहिए - डीएमके
चेन्नई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समान नागरिक संहिता की वकालत करते हुए कहा है कि देश में दो कानून नहीं चल सकता। पीएम मोदी के इस बयान पर तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके ने तर्क दिया कि पहले हिंदुओं के लिए एक समान संहिता लागू की जानी चाहिए, जिसके बाद सभी जातियों के लोगों को मंदिरों में प्रार्थना करने की अनुमति देनी होगी।
डीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा। समान नागरिक संहिता सबसे पहले हिंदू धर्म में लागू की जानी चाहिए। अनुसूचित जाति और जनजाति सहित हर व्यक्ति को देश के किसी भी मंदिर में पूजा करने की अनुमति दी जानी चाहिए। हम समान नागरिक संहिता केवल इसलिए नहीं चाहते, क्योंकि संविधान ने हर धर्म को सुरक्षा दी है।”
वहीं, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के एक बयान में कहा गया, पीएम मोदी को पहले देश में गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी के बारे में जवाब देना चाहिए। वेणुगोपाल ने कहा, वह (पीएम) मणिपुर मुद्दे पर कभी नहीं बोलते। हिंसा में पूरा राज्य जल रहा है। पीएम मोदी इन मुद्दों से सिर्फ लोगों का ध्यान भटका रहे हैं।
समान नागरिक संहिता बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा रहा है। पीएम मोदी ने भोपाल में वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने के बाद एक सवाल के जवाब में कहा- यूनिफॉर्म सिविल कोड पर कुछ लोग भड़का रहे हैं। एक घर में परिवार के सदस्य के लिए एक कानून हो, परिवार के दूसरे सदस्य के लिए दूसरा कानून हो, तो क्या वो घर चल पाएगा? एक घर दो कानूनों से नहीं चल सकता। यूनिफॉर्म सिविल कोड पर बीजेपी भ्रम दूर करेगी।
यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब है- भारत के हर नागरिक के लिए एक समान कानून, चाहे वह किसी भी धर्म हो या जाति का हो। जिस भी राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होगा- वहां, शादी, तलाक, एडॉप्शन, उत्तराधिकार, जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा। आसान शब्दों में समझें, तो यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी देश के सभी नागरिकों के लिए एक जैसा पर्सनल लॉ और लागू करना राज्य की ड्यूटी है।
पिछले साल सितंबर में समान नागरिक संहिता तैयार करने के लिए एक पैनल का प्रावधान करने वाला निजी विधेयक विपक्षी दलों के भारी विरोध के बावजूद राज्यसभा में पेश किया गया था। इस महीने की शुरुआत में विधि आयोग ने समान नागरिक संहिता पर नए सिरे से परामर्श प्रक्रिया शुरू की, जिसमें राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे पर सभी हितधारकों से विचार मांगे गए।
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