जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने कहा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी जिम्मेदार नागरिक को कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जब तक कोई व्यक्ति दोषी नहीं पाया जाता, तब तक उसे निर्दोष माना जाता है।
नई दिल्ली। जस्टिस यशवंत वर्मा के घर मिले कैश मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का फैसला एक खतरनाक चलन है। सिब्बल का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी जिम्मेदार नागरिक को इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
यह एक खतरनाक उदाहरण है सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच रिपोर्ट, वीडियो और फोटो जारी करने पर सिब्बल ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि यह उनके विवेक पर निर्भर करता है। यह सही है या गलत... यह तो समय ही बताएगा। कोर्ट ही दस्तावेज का स्रोत है। लोग भी इस पर विश्वास करते हैं। लेकिन यह सच है या नहीं... यह बाद में तय होगा।
मेरा मानना है कि यह एक खतरनाक उदाहरण है। संस्थागत प्रतिक्रिया में संस्था को लिखित रूप में लागू करना चाहिए कि क्या किया जाना चाहिए। कपिल सिब्बल का कहना है कि इस पर बार से सलाह मशविरा करके फैसला लिया जाना चाहिए। हम जजों के बारे में जीतना जानते हैं...वे भी यही जानते हैं। इन मुद्दों से निपटने और एक तंत्र बनाने के लिए एक समिति होनी चाहिए। अगर ये बातें सार्वजनिक की जाती हैं तो संस्था पहले ही हार चुकी है।
जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में सिब्बल ने कहा कि जब तक कोई व्यक्ति दोषी नहीं पाया जाता, तब तक उसे निर्दोष माना जाता है। इस मामले में अभी जांच पूरी नहीं हुई है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, किसी जिम्मेदार नागरिक को इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
14 मार्च को नई दिल्ली में जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में आग लगने की घटना हुई थी। इस दौरान उनके घर से कथित तौर पर नकदी मिलने के खुलासे से हड़कंप मच गया था। बाद में उनका दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट में तबादला कर दिया गया था।
22 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायाधीश अनु शिवरामन शामिल हैं। यह समिति मामले की जांच करेगी। शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय की संशोधित आंतरिक जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक की। अदालत ने वीडियो और तस्वीरें भी साझा कीं।