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भारत और ईरान ने कई मुद्दों पर की चर्चा,एक दूसरे के बनेंगे सहयोगी
नई दिल्ली। भारत-ईरान संबंध सार्थक अंतःक्रियाओं द्वारा सदियों से चले आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, दोनों देश 1947 तक एक सीमा साझा करते थे और अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं में कई सामान्य विशेषताएं साझा करते थे। दक्षिण एशिया और फारस की खाड़ी दोनों में मजबूत वाणिज्यिक, ऊर्जा, सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के बीच संबंध हैं। भारत में ईरान के राजदूत इराज इलाही और केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दोनों देशों के बीच सहयोग के विकास पर चर्चा की। हाल ही में ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन ने तेहरान में विदेश मंत्री एस जयशंकर की मेजबानी की।
दोनों नेताओं ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और ब्रिक्स के भीतर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों के विस्तार पर चर्चा की। एक्स पर एक पोस्ट में ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा- ईरान के विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर की मेजबानी की, हमने नवीनतम क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास, विशेष रूप से ज़ायोनी शासन के नरसंहार और फिलिस्तीनियों के खिलाफ अपराधों पर बातचीत की। हमने शंघाई संगठन के भीतर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों के विस्तार पर चर्चा की। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने और जयशंकर ने इजरायल-हमास युद्ध सहित नवीनतम अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय विकास पर चर्चा की।
बैठक के दौरान होसैन अमीर अब्दुल्लाहियन ने ईरान के पास अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षा प्रदान करने के महत्व पर प्रकाश डाला। 29 जनवरी को भारतीय नौसेना के मिशन तैनात युद्धपोत की त्वरित प्रतिक्रिया ने अपहृत ईरानी जहाज और चालक दल की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की। सोमालिया के पूर्वी तट और अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती रोधी अभियानों पर तैनात आईएनएस सुमित्रा ने ईरानी ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाज (एफवी) ईमान के अपहरण के संबंध में एक संकट संदेश का जवाब दिया। एफवी पर समुद्री डाकू सवार थे और चालक दल को बंधक बना लिया गया था।
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