- 'संविधान पर हमला और फासीवादी विचारधारा...', मौलाना महमूद मदनी ने मुसलमानों के बारे में हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणियों पर उन पर जमकर निशाना साधा।

'संविधान पर हमला और फासीवादी विचारधारा...', मौलाना महमूद मदनी ने मुसलमानों के बारे में हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणियों पर उन पर जमकर निशाना साधा।

मौलाना मदनी ने कहा कि किसी खास समुदाय को डराना, उनसे वोट देने का अधिकार छीनने की धमकी देना, और उनके खिलाफ आर्थिक शोषण को बढ़ावा देना खुले फासीवाद और सामूहिक सज़ा की मानसिकता को दिखाता है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हालिया बयानों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान न सिर्फ खुलेआम हिंसा और नफरत को बढ़ावा देते हैं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे पर भी सीधा हमला हैं।

मौलाना मदनी ने कहा कि किसी खास समुदाय को डराना, उनसे वोट देने का अधिकार छीनने की धमकी देना, और उनके खिलाफ आर्थिक शोषण को बढ़ावा देना खुले फासीवाद और सामूहिक सज़ा की मानसिकता को दिखाता है। उन्होंने साफ किया कि किसी भी सभ्य, लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था में ऐसी सोच बिल्कुल भी मंज़ूर नहीं है।

भड़काऊ बयानों पर तुरंत FIR दर्ज करें: मदनी

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इन बयानों को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी या चुनावी रणनीति मानकर नज़रअंदाज़ करना लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों से समझौता करने जैसा होगा। मौलाना मदनी ने मांग की कि ऐसे भड़काऊ और बांटने वाले बयानों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए, और एक साफ संदेश दिया जाए कि भारत में न तो कोई व्यक्ति कानून से ऊपर है, और न ही कोई पद नफरत फैलाने का अधिकार देता है।

यह राज्य की शक्ति का दुरुपयोग है: मौलाना मदनी

मौलाना मदनी ने कहा कि अगर किसी राज्य का मुख्यमंत्री खुद यह मानता है कि वह प्रशासनिक और सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल एक समुदाय के खिलाफ हथियार के तौर पर कर रहा है, लोगों को झूठी शिकायतें दर्ज करने, बेबुनियाद आपत्तियां उठाने और उन्हें सिस्टमैटिक तरीके से परेशान करने के लिए उकसा रहा है, तो यह राज्य की शक्ति का घोर दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान एक समुदाय के खिलाफ हिंसा को खुलेआम जायज़ ठहराने की कोशिश है, जो पूरे लोकतांत्रिक ढांचे की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

लोकतांत्रिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक राष्ट्रीय मुद्दा: मदनी

उन्होंने साफ किया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस मामले को सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं मानती, बल्कि इसे देश के लोकतांत्रिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक बेहद गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा मानती है। अगर आज एक राज्य में एक समुदाय को निशाना बनाने की इजाज़त दी जाती है, तो कल यही रवैया दूसरे समुदाय के खिलाफ भी अपनाया जा सकता है।

मौलाना मदनी ने सभी संवैधानिक संस्थाओं, खासकर चुनाव आयोग, न्यायपालिका और सिविल सोसाइटी से अपील की कि वे मूक दर्शक बने रहने के बजाय अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारियों को पूरा करें, ताकि नफरत, बंटवारे और डर की राजनीति करने वालों को समय रहते रोका जा सके और लोकतंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Comments About This News :

खबरें और भी हैं...!

वीडियो

देश

इंफ़ोग्राफ़िक

दुनिया

Tag