- सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नियमों पर रोक लगाई; परशुराम सेना ने कहा, "हमें सरकार पर भरोसा नहीं है, हम 1 फरवरी से अपना विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे..."

सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नियमों पर रोक लगाई; परशुराम सेना ने कहा,

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर राजस्थान में विवाद और बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम रोक के आदेश के बावजूद, श्री परशुराम सेना सहित सवर्ण समुदाय अभी भी असंतुष्ट है।

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विवाद अब राजस्थान की सड़कों से लेकर सत्ता के गलियारों तक पहुंच गया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इन नियमों को लागू करने पर अंतरिम रोक लगाकर स्थिति को शांत करने की कोशिश की, लेकिन राजस्थान का सवर्ण समुदाय इस फैसले से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है। श्री परशुराम सेना ने कोर्ट के आदेश को नाकाफी बताया है और सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है।

जयपुर में मीडिया से बात करते हुए, श्री परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश रणवा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई। उन्होंने साफ तौर पर कहा, "कोर्ट का यह रोक का आदेश समुदाय को खुश करने के लिए सिर्फ एक 'टोकन जेस्चर' है।" रणवा ने तर्क दिया कि न्यायिक रोक अस्थायी होती है; जिस पर आज रोक लगी है, उसे कल हटाया जा सकता है। सवर्ण समुदाय की साफ मांग है कि सरकार इस संवेदनशील मामले में सीधे दखल दे और इन विवादित UGC नियमों को स्थायी रूप से वापस लेने के लिए एक गजट नोटिफिकेशन जारी करे।

सरकार की मंशा पर अविश्वास और उग्र आंदोलन की चेतावनी
रणवा ने आरोप लगाया कि उन्हें सरकार की मंशा पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार लिखित में अपना फैसला वापस नहीं लेती, तब तक सवर्ण समुदाय का आंदोलन जमीन पर जारी रहेगा। आंदोलन की अगली रणनीति बताते हुए उन्होंने घोषणा की कि 1 फरवरी, 2026 को संगठन द्वारा राजस्थान के सभी जिला और तहसील मुख्यालयों पर एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

सवर्ण संगठनों की एकता और भविष्य की रणनीति
परशुराम सेना के अनुसार, कई अन्य सवर्ण संगठन भी इस संघर्ष में शामिल हो रहे हैं, जिससे यह एक बड़े पैमाने पर जन आंदोलन बन रहा है। दिनेश रणवा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार 1 फरवरी के प्रदर्शन के बाद भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो पूरे राज्य में एक उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। समुदाय का मानना ​​है कि ये नियम उनके शैक्षिक और सामाजिक हितों के खिलाफ हैं, और इन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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