गुजरात सरकार ने 'ऑपरेशन गंगाजल' के तहत दो IAS अधिकारियों को अनिवार्य रूप से रिटायर कर दिया। यह कार्रवाई दोनों अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर की गई।
गुरुवार को, गुजरात सरकार ने दो IAS अधिकारियों—के. राजेश (2011 बैच) और गौरव दहिया (2010 बैच)—को अनिवार्य रूप से रिटायर कर दिया, जिन पर भ्रष्टाचार, अनुशासनात्मक मुद्दों और गंभीर कदाचार के आरोप थे। यह कार्रवाई सरकार द्वारा ऐसे अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई पहल 'ऑपरेशन गंगाजल' के तहत की गई। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, यह निर्णय दोनों अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड और उनके खिलाफ लंबित विभागीय कार्यवाही की समीक्षा के बाद लिया गया।
इस कार्रवाई के समय, के. राजेश पहले से ही सस्पेंशन (निलंबन) में थे। उन पर हथियार लाइसेंस जारी करने और सरकारी ज़मीन के आवंटन के संबंध में रिश्वत लेने के आरोप थे। वहीं, गौरव दहिया गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त के रूप में कार्यरत थे। अपनी सेवा के दौरान अनुशासनात्मक कार्यवाही, विवादों और कथित कदाचार के संबंध में उन पर जांच चल रही थी। खबरों के अनुसार, इनमें नेशनल हेल्थ मिशन में उनके कार्यकाल से संबंधित मामले भी शामिल थे। सरकार ने इन मामलों और उनके सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर अनिवार्य रिटायरमेंट का आदेश जारी किया।
दो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
गुरुवार को, गुजरात सरकार ने 'ऑपरेशन गंगाजल' के तहत दो IAS अधिकारियों, के. राजेश और गौरव दहिया, को अनिवार्य रूप से रिटायर कर दिया। यह ऑपरेशन भ्रष्टाचार, अनुशासनात्मक मुद्दों और गंभीर कदाचार के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों को लक्षित करता है। गुजरात सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई उनके सर्विस रिकॉर्ड और उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही पर आधारित थी।
दोनों अधिकारियों के खिलाफ आरोप
गौरतलब है कि 2011 बैच के IAS अधिकारी के. राजेश को सरकार द्वारा अनिवार्य रिटायरमेंट का आदेश दिए जाने के समय पहले ही सस्पेंड किया जा चुका था। उन पर हथियार लाइसेंस जारी करने और सरकारी ज़मीन के आवंटन से जुड़े मामलों में रिश्वत लेने के आरोप थे। 2010 बैच के IAS अधिकारी गौरव दहिया को गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त के पद पर रहते हुए अनिवार्य रूप से रिटायर किया गया।
मामले से वाकिफ एक अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई उनकी सेवा के दौरान अनुशासनात्मक कार्यवाही, विवादों और कदाचार की जांच के बाद की गई। इनमें नेशनल हेल्थ मिशन में उनके कार्यकाल से जुड़े मामले शामिल थे।