पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग करने वाले CJP के आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की है।
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के चल रहे आंदोलन का समर्थन किया है। शुक्रवार को दिल्ली से लौटने पर कोलकाता एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने CJP, युवाओं और छात्रों के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के प्रति अपना समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि वह CJP और युवा पीढ़ी के साथ मजबूती से खड़ी हैं और ऐसी कथित ज्यादतियों को खत्म करने की मांग की।
ममता बनर्जी से दिल्ली और मुंबई में CJP द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछा गया, जिनमें CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की जा रही है। उन्होंने पहले अगस्त में NEET मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था। गौरतलब है कि ममता के अलावा शिवसेना और आम आदमी पार्टी ने भी CJP को अपना समर्थन दिया है।
**10 अक्टूबर को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की तैयारी**
CJP ने घोषणा की है कि अगर ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शुक्रवार रात मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद यह घोषणा की। पुलिस की अनुमति न मिलने के बावजूद, बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन के लिए शिवाजी पार्क में जमा हुए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दिपके ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो देश भर से CJP समर्थक 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली आएंगे। इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताते हुए उन्होंने उन सभी लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की जो निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं। दिपके ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलेगा। उन्होंने कहा कि अब यह सरकार और दिल्ली पुलिस पर निर्भर करता है कि वे शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करते हैं या 20 जुलाई को हुई कथित कार्रवाई जैसी स्थिति को दोहराते हैं। उन्होंने इस आंदोलन को लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बताया और उन नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं।
दिपके ने 'चलो दिल्ली' का आह्वान किया
इससे पहले, शिवाजी पार्क में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा था कि अगर ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो देश भर के 'जेन ज़ेड' (Gen Z) युवा दिल्ली की ओर मार्च करेंगे। उन्होंने इस पहल को 'जंतर-मंतर 2.0' का नाम दिया और 'चलो दिल्ली' (दिल्ली मार्च) का आह्वान किया।
CJP की मुख्य मांगें क्या हैं?
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज़ करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को रद्द करने की भी मांग की है।
CJP ने मतदाता सूची के संशोधन में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। संगठन के नेताओं का दावा है कि कई राज्यों में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए या नए नाम जोड़े गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया कि दो साल की अवधि में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की मतदाता सूची में 40 लाख नए मतदाता जोड़े गए। उन्होंने आगे दावा किया कि दिल्ली, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम हटाए गए।
दिल्ली और तमिलनाडु से जुड़े आरोप
दिपके के अनुसार, दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के विधानसभा क्षेत्र से 40,000 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे, और बाद में केजरीवाल लगभग 4,000 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। तमिलनाडु के संबंध में, उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के विधानसभा क्षेत्र से लगभग एक लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र से वोटरों के नाम हटा दिए गए थे। वोटरों के नाम हटाए जाने के इन आरोपों को चुनाव नतीजों से जोड़ते हुए, CJP ने दावा किया है कि वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों से सत्ताधारी BJP को फ़ायदा हुआ।
हालांकि, CJP के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संगठन की मांगें और आरोप, चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं और वोटर लिस्ट के प्रबंधन के प्रति उनके विरोध का हिस्सा हैं।