फ्लाईदुबई के भारतीय कैप्टन, स्मित मच्छार ने एक साथी पायलट के जानलेवा हमले में बुरी तरह घायल और खून से लथपथ होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाज़ा खोला। उन्होंने 9/11 जैसी घटना को रोका और पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल कायम की। अब, गुजरात सरकार बहादुर कैप्टन स्मित मच्छार को 'विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार' से सम्मानित करेगी।
फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ-1073 से जुड़ी यह घटना एविएशन (हवाई यात्रा) के इतिहास में एक नया और डरावना मोड़ लेकर आई है। अब तक दुनिया हाइजैकिंग को बाहर से आने वाले खतरे के तौर पर देखती थी, लेकिन इस घटना ने दिखाया कि खतरा कॉकपिट के अंदर भी हो सकता है। 174 यात्रियों (जिनमें 166 इज़राइली नागरिक और 27 बच्चे शामिल थे) को ले जा रहा यह विमान एक बड़ी दुर्घटना का शिकार हो सकता था, अगर भारतीय मूल के पायलट स्मित मच्छार ने हिम्मत और सूझबूझ न दिखाई होती।
कैप्टन स्मित मच्छार को 'विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार' मिलेगा
गुजरात सरकार फ्लाईदुबई के भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार को 'विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार' से सम्मानित करेगी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। इससे पहले, सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा: "गुजरात और पूरे देश को बहुत गर्व है। आसमान में कैप्टन स्मित मच्छार ने जो अटूट साहस और वीरता दिखाई, वह वाकई कल्पना से परे है। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, उन्होंने हमलावर का सामना किया, एक बड़ी त्रासदी को टाला और 174 यात्रियों की जान बचाई।"
'कैप्टन स्मित मच्छार की रगों में गुजराती खून दौड़ता है'
उन्होंने आगे लिखा: "वह एक गौरवान्वित भारतीय हैं और उनकी रगों में गुजराती खून दौड़ता है—जो हमारे लचीलेपन और साहस का सच्चा प्रतीक है। गुजराती मूल के इस बहादुर बेटे ने वैश्विक मंच पर पूरे देश का मान बढ़ाया है।" "मैं उनकी असाधारण बहादुरी को सलाम करता हूं और उनके जल्द और पूरी तरह से ठीक होने की कामना करता हूं।"
**कैप्टन स्मित अमरेली के रहने वाले हैं**
कैप्टन स्मित का परिवार मूल रूप से गुजरात के अमरेली जिले के सावरकुंडला का रहने वाला है, लेकिन स्मित के जन्म से पहले ही उनके पिता मुंबई के घाटकोपर में बस गए थे। स्मित का जन्म और पालन-पोषण मुंबई में ही हुआ। मुंबई में कैप्टन स्मित के एक पुराने पड़ोसी ने उनके अच्छे स्वभाव से जुड़ी दिल को छू लेने वाली बातें बताईं। पड़ोसी डॉ. जानित शाह ने बताया कि दुबई जाने से पहले स्मित मच्छार लगभग 10 से 15 साल तक उनके पड़ोस में रहे थे।
**पूरी कहानी क्या है?**
भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गए हैं। 30 सितंबर, 2026 को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। कॉकपिट के अंदर, को-पायलट ने चाकू से उन पर हमला किया और प्लेन को क्रैश करने की कोशिश की। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, मच्छार ने मुकाबला किया, कॉकपिट का दरवाज़ा खोला और यात्रियों व क्रू की मदद से हमलावर को काबू में किया। हालांकि प्लेन की ऊंचाई में कई हज़ार फीट की कमी आई, लेकिन इसे सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित रूप से इमरजेंसी लैंडिंग कराने में कामयाबी मिली।
प्लेन में सवार सभी 174 लोग सुरक्षित रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और दुनिया भर के कई नेताओं ने उन्हें 'हीरो' बताया है। मुंबई के घाटकोपर के रहने वाले मच्छार की बहादुरी ने 9/11 जैसी संभावित त्रासदी को टाल दिया। फिलहाल अस्पताल में उनकी हालत स्थिर है। उनकी अटूट हिम्मत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।