नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने इस बात पर खुशी जताई कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले का संज्ञान लिया है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार (5 अक्टूबर) को चुनाव आयुक्त के फैसलों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत खुशी है कि शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे का संज्ञान लिया है। उन्होंने पार्टी की बैठक के बाद ये बातें कहीं।
श्रीनगर में पार्टी मुख्यालय के बाहर मीडिया से बात करते हुए पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त ने दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना फैसले लिए; मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसका संज्ञान लिया है। हमें उम्मीद है कि वह मामले की जांच करेगा और गलतियों को सुधारेगा।"
**श्रीनगर के विधायकों और वार्ड अध्यक्षों के साथ बातचीत**
उन्होंने आगे बताया कि यह बैठक संगठन को मजबूत करने और उन कमियों की पहचान करने के लिए बुलाई गई थी जिन्हें दूर करने की जरूरत है। पूर्व सीएम ने कहा, "यह बैठक पार्टी को मजबूत करने के लिए बुलाई गई थी।" उन्होंने बताया कि श्रीनगर के आठ विधायकों, वार्ड अध्यक्षों और पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा की गई।
**पार्टी के नए संविधान पर फारूक अब्दुल्ला**
फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "हमने उन कमियों पर चर्चा की जिन्हें दूर करने की जरूरत है।" पार्टी के नए संविधान के बारे में उन्होंने कहा कि इसे जरूरी आंतरिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही जनता के सामने पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा, "सबसे पहले, हम इसे अपनी कार्य समिति के सामने रखेंगे। मंजूरी मिलने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।" जम्मू-कश्मीर में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों के बीच, नेशनल कॉन्फ्रेंस का दोहरा फोकस है: संगठनात्मक बदलाव और चुनाव आयोग से जुड़ी कानूनी कार्यवाही में शामिल होना। इससे पहले, रविवार (4 अक्टूबर) को सीईसी ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "सबसे बड़ी गलती जवाहरलाल नेहरू के प्रशासन ने की थी। चुनाव आयोग पूरी तरह से स्वतंत्र होना चाहिए था। आज हम उसकी कीमत चुका रहे हैं। अगर चुनाव आयोग स्वायत्त होता, तो आज हालात ऐसे नहीं होते।"