क्या 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के सौरव दास और आशुतोष रंका आज रिहा होंगे? उनकी रिहाई के लिए SEM (सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट) कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, और आज इस पर फैसला आने की उम्मीद है।
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रंका आज रिहा हो सकते हैं। मंदिर मार्ग स्थित SEM कोर्ट में उनकी रिहाई के लिए एक याचिका दायर की गई है। आज उनकी रिहाई को लेकर फैसला आ सकता है। फिलहाल दोनों जेल में हैं और पांच दिन की न्यायिक हिरासत (जुडिशियल कस्टडी) काट रहे हैं।
उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया?
सौरव दास और आशुतोष रंका को 13 अक्टूबर को बिना अनुमति जंतर-मंतर इलाके में घुसने के आरोप में प्रिवेंटिव अरेस्ट (एहतियाती गिरफ्तारी) के तहत हिरासत में लिया गया था। CJP के अन्य समर्थकों के साथ, उन्होंने एक निजी परिसर के गेट और दीवार को फांदकर जंतर-मंतर में प्रवेश किया। वहां उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाने शुरू कर दिए। बताया जा रहा है कि पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसमें बिना अनुमति प्रवेश (trespassing), निषेधाज्ञा का उल्लंघन, शांति बनाए रखने के समझौते (पीस बॉन्ड) की शर्तों को तोड़ना, और सरकारी कर्मचारी को उनके आधिकारिक काम में बाधा डालना जैसे आरोप शामिल हैं। उन्हें SEM कोर्ट के सामने पेश किया गया, जहां से आशुतोष रंका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उनके साथी अजिंक्य शिंदे को एक पर्सनल बॉन्ड और 5,000 रुपये की जमानत राशि जमा करने पर रिहा कर दिया गया। शर्त यह रखी गई कि उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखनी होगी और अच्छा व्यवहार करना होगा।
गिरफ्तारियों पर दिल्ली पुलिस का बयान
दिल्ली पुलिस ने एक बयान में बताया कि 13 अक्टूबर की सुबह, सौरव दास, आशुतोष रंका, अजिंक्य शिंदे और CJP के 11 अन्य सदस्य एक निजी संपत्ति से होते हुए जंतर-मंतर पहुंचे थे। गौरतलब है कि जंतर-मंतर को अब प्रदर्शन के लिए तय की गई जगहों की सूची से हटा दिया गया है। पुलिस के अनुसार, वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनके काम में बाधा डाली। पुलिस के एक बयान में पुष्टि की गई है कि सभी 14 लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने बताया कि दास, रंका और शिंदे को 'प्रिवेंटिव अरेस्ट' (एहतियाती गिरफ्तारी) में रखा गया है, क्योंकि उन पर सार्वजनिक शांति भंग करने और कानून तोड़ने की कोशिश करने का आरोप है।
अभिजीत दिपके को मिली जमानत
इस बीच, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को SEM (स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) कोर्ट से जमानत मिल गई है। उन्हें पहले हिरासत में लिया गया था और बाद में पुलिस ने 'लेहरा दो तिरंगा' मार्च (जो कनॉट प्लेस में प्रस्तावित था) से ठीक पहले उन्हें 'प्रिवेंटिव अरेस्ट' में ले लिया था। दिपके को शांति भंग करने के एक नए मामले में, 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले, 10 अक्टूबर को अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था, जब वे CJP के एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। उस समय भी शांति भंग करने का एक अलग मामला दर्ज किया गया था, और उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को कहा गया था।