शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने महिलाओं के आरक्षण पर चर्चा करने के लिए सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने 2029 तक 33% आरक्षण देने के वादे को पूरा करने, और साथ ही जनगणना तथा परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया को समय पर पूरा करने की अपील की है।
महाराष्ट्र में, शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर बात की है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर विचार-विमर्श करने के लिए सभी राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलाई जानी चाहिए। चतुर्वेदी ने याद दिलाया कि 2023 में, 2029 के चुनावों में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का वादा किया गया था। उन्होंने बताया कि इसे लागू करने के लिए जनगणना, परिसीमन प्रक्रिया और जरूरी संवैधानिक संशोधनों का होना बहुत महत्वपूर्ण है।
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प्रियंका चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाने की मांग करते हुए एक पत्र लिखा है। उन्होंने जोर दिया कि महिलाओं के आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया और समय-सीमा को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बातचीत होना जरूरी है, क्योंकि इससे इस विषय पर आम सहमति बनाने में मदद मिल सकती है।
जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया का महत्व
चतुर्वेदी ने बताया कि महिलाओं के आरक्षण को लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। परिसीमन से लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं तय होती हैं, साथ ही यह भी तय होता है कि प्रतिनिधित्व का स्वरूप कैसा होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव करने पड़ सकते हैं, जिसके लिए संसद में जरूरी बहुमत की आवश्यकता होगी।
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2029 तक 33% आरक्षण का वादा
शिवसेना (UBT) नेता ने इस बात पर जोर दिया कि 2023 में देश की महिलाओं से 2029 तक 33% आरक्षण देने का वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि इस आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया समय पर पूरी होनी चाहिए। हालांकि, इसे लागू करने की वास्तविक समय-सीमा संबंधित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।
क्या है महिला आरक्षण
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कानून? सितंबर 2023 में, संसद ने संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम पारित किया, जिसे 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के नाम से भी जाना जाता है। यह लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। कानून के अनुसार, यह आरक्षण जनगणना के बाद होने वाले पहले परिसीमन (डिलिमिटेशन) के बाद लागू होगा। इसलिए, इस आरक्षण के लागू होने का समय जनगणना की प्रगति, परिसीमन प्रक्रिया और इससे जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।