शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने BJP पर चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया है। लोकतंत्र को बचाने के लिए सत्ता परिवर्तन की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों के भीतर पूरे देश में ऐसा बदलाव देखने को मिलेगा।
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने सत्ता परिवर्तन की मांग करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की मांग करना कोई अपराध नहीं है। राउत ने केंद्र सरकार पर तानाशाही तरीके से काम करने का आरोप लगाया और दावा किया कि चुनावों में धांधली हुई है। उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों के भीतर सत्ता में बदलाव आएगा—न केवल महाराष्ट्र में, बल्कि पूरे देश में।
सत्ता परिवर्तन की संभावना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच, संजय राउत ने सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि देश में अभी तानाशाही शासन चल रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए।
संजय राउत ने कहा, "क्या लोकतंत्र में 'सत्ता परिवर्तन' की मांग करना कोई अपराध है? यहाँ एक तानाशाही सरकार चल रही है, जो गैर-कानूनी तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। यह सब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मदद से हो रहा है—जो एक 'माफिया' की तरह हैं और BJP के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। चुनावों में धांधली हुई है।"
'लोकतंत्र को बचाने के लिए बदलाव जरूरी है'
संजय राउत का तर्क है कि मौजूदा सरकार को हटाना और सत्ता में बदलाव लाना राष्ट्रीय हित का मामला है। उनके अनुसार, लोकतंत्र की रक्षा के लिए ऐसा बदलाव जरूरी है। उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं के एकजुट होने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
राउत ने कहा, "अगर हम इस सरकार को हटाकर सत्ता में बदलाव लाना चाहते हैं, तो यह राष्ट्रीय हित का विषय है। लोकतंत्र को बचाने के लिए ऐसा करना बहुत जरूरी है। चाहे प्रशांत भूषण हों, राहुल गांधी हों, उद्धव ठाकरे हों या ममता बनर्जी—हम सब एक सुर में बोलेंगे। हम सत्ता में बदलाव चाहते हैं। अगले छह महीनों के भीतर, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि महाराष्ट्र और पूरे देश में यह बदलाव आए।"
संजय राउत के इस बयान से सत्ता परिवर्तन को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से एकजुट होने और मिलकर आवाज़ उठाने का आह्वान किया है। हालाँकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि भविष्य की राजनीतिक रणनीति क्या होगी, खासकर तब जब उन्होंने महाराष्ट्र और राष्ट्रीय स्तर—दोनों जगह—छह महीने के भीतर सत्ता परिवर्तन का दावा किया है।