मोहन यादव ने उज्जैन में अपने पुश्तैनी घर का एक हिस्सा खुद फावड़े से तोड़ा और उस जगह को विकास कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि जिस घर में बचपन बीता हो, उसे तोड़ने पर गहरी भावनाएं जागना स्वाभाविक है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का जन-कल्याण के प्रति समर्पण और सादगी के प्रति उनका लगाव इस बात से साफ झलकता है कि उन्होंने खुशी-खुशी उज्जैन के व्यापक विकास, खासकर सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के लिए अपना पुश्तैनी घर और जन्मस्थान सौंप दिया। उन्होंने खुद फावड़ा चलाकर घर का एक हिस्सा तोड़ा। अपने पुश्तैनी घर को जनता को सौंपते समय मुख्यमंत्री डॉ. यादव काफी भावुक दिखे। उनका मानना है कि भले ही अपने जन्मस्थान वाले घर को तोड़ने से दिल पर असर पड़ता है, लेकिन विकास के लिए ऐसे त्याग करने ही पड़ते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह कदम उज्जैन के विकास और जन-सुविधाओं के विस्तार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है।
गौरतलब है कि सीएम डॉ. यादव 27 सितंबर को अपने पुश्तैनी घर गए थे। उन्होंने घर के बाहर पूजा-अर्चना की और फिर हाथ में फावड़ा लेकर नए विकास कार्य की नींव रखी। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जिस घर में इंसान बड़ा हुआ हो और बचपन में खेला हो, उसे तोड़ने पर भावुक होना स्वाभाविक है। लेकिन अगर सिंहस्थ के लिए यह जरूरी है, तो हमें यह त्याग करना ही होगा। हम सब मिलकर ऐसा कर रहे हैं। पूरा देश देख रहा है कि लोग दूसरों की मदद के लिए खुशी-खुशी अपने घर तोड़ रहे हैं।"
उज्जैन ने मिसाल कायम की
सीएम डॉ. यादव ने मीडिया से कहा, "जब मैं पहली बार साइंस कॉलेज से चुनाव जीता—संयुक्त सचिव, फिर अध्यक्ष और उसके बाद हर चुनाव में—तो एक बात हमेशा मेरे मन में रही: भविष्य को ध्यान में रखते हुए, हमें अपने आचरण और कार्यों से एक मिसाल कायम करनी चाहिए। मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में एक बेहतरीन उदाहरण हैं।" निजी हितों से ऊपर उठकर, वे नियमों, कानूनों और सुशासन के लिए जरूरी सभी बातों को प्राथमिकता देते हैं। उनके सार्वजनिक जीवन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उज्जैन के लोगों ने स्वेच्छा से अपने घरों को पीछे हटाया; यह एक अनुकरणीय उदाहरण है। उज्जैन की आबादी 8 लाख है, फिर भी यहाँ 40 करोड़ (400 मिलियन) यात्रियों का भार आता है। इसमें सभी का योगदान रहा। मैं अपनी सरकार का भी धन्यवाद करता हूँ; बिना किसी भेदभाव के—चाहे हिंदू हों, मुस्लिम, सिख, ईसाई या पारसी—सभी ने अपने निर्माण (पूजा-स्थलों सहित) को पीछे हटाया। इससे सरकार के प्रति भरोसा बढ़ता है। यही उज्जैन का आदर्श है; यही प्रशासन में विश्वास पैदा करता है।
**जनहित सर्वोपरि**
यह ध्यान देने योग्य है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनहित को सबसे ऊपर रखते हैं। सिंहस्थ की तैयारियों के बीच, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अपना पुश्तैनी घर भी प्रोजेक्ट के दायरे में आ गया। खुद अपने घर पर फावड़ा चलाकर उन्होंने यह संदेश दिया कि विकास योजना का असर निजी संपत्ति पर भी पड़ता है। सड़क चौड़ीकरण की प्रशासनिक प्रक्रिया में उनके परिवार की संपत्ति के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया गया जैसा किसी अन्य प्रभावित इमारत के साथ। घर से जुड़ी दशकों पुरानी पारिवारिक यादों के बावजूद, सीएम डॉ. यादव ने सिंहस्थ के लिए ज़रूरी शहरी बदलाव को जनहित का मामला माना। उनके पुश्तैनी घर पर पड़ने वाला असर उस बड़े बदलाव का हिस्सा है जिसका मकसद सिंहस्थ 2028 से पहले भविष्य की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पुराने उज्जैन की सड़कों, ट्रैफिक सिस्टम और शहरी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना है।
**सड़क चौड़ीकरण परियोजना**
खास बात यह है कि खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा और जीवाजीगंज पुलिस स्टेशन इलाके से होते हुए गणेश चौक तक जाने वाली 730 मीटर लंबी सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने का काम शुरू हो गया है। इस सड़क चौड़ीकरण और विकास परियोजना पर राज्य सरकार द्वारा आवंटित लगभग ₹9.80 करोड़ खर्च किए जाएंगे। यह रास्ता शहर की अहम और सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं और वाहनों की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए...