कार्ति चिदंबरम ने कहा कि RTI कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार द्वारा लागू किया गया एक ऐतिहासिक कदम था, जिसका मकसद देश भर में लोकतांत्रिक जवाबदेही को मजबूत करना था।
तमिलनाडु में, विपक्षी दलों के साथ-साथ सहयोगी कांग्रेस पार्टी ने भी मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की TVK सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें कानून-व्यवस्था संभालने वाले सार्वजनिक विभाग को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर रखा गया है। कांग्रेस सांसद ने विजय सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि RTI का दायरा सीमित करने के बजाय उसे बढ़ाया जाना चाहिए।
**TVK सरकार के फैसले पर कांग्रेस सांसद का बयान**
शिवगंगा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने रविवार (27 सितंबर, 2026) को TVK सरकार के फैसले का विरोध करते हुए एक पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने कहा, "विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार का सार्वजनिक (कानून-व्यवस्था) विभाग को RTI अधिनियम के दायरे से बाहर रखने का फैसला कोई अच्छी मिसाल नहीं कायम करता। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि RTI कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार द्वारा लागू किया गया एक ऐतिहासिक कदम था। इसका उद्देश्य देश भर में लोकतांत्रिक जवाबदेही को मजबूत करना था।"
**लोगों को अहम जानकारी से दूर रखा जा रहा है: कार्ति**
उन्होंने आगे कहा, "कानून-व्यवस्था विभाग कई अहम मामलों को संभालता है, जैसे पुलिस फायरिंग, हिरासत में मौत, टॉर्चर और रिमांड पर मौजूद कैदियों के बीच झड़पों की रिपोर्ट की समीक्षा; सुरक्षा से जुड़े हिरासत के मामले; सांप्रदायिक और जातीय झड़पों की रिपोर्ट; राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों को वापस लेने के अनुरोध; और बहुत भड़काऊ लेखों, समाचार रिपोर्टों और भाषणों के संबंध में मुकदमा चलाने की मंजूरी देना।" "अब, इस अहम जानकारी को जनता से दूर रखा जा रहा है।"
उन्होंने आगे कहा, "ऐसे फैसले पारदर्शी सरकार के अनुरूप नहीं हैं। RTI का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए, सीमित नहीं किया जाना चाहिए।"