आज से शुरू हो रहे हफ़्ते में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतें इन दरों पर असर डालेंगी।
आज, हफ़्ते के पहले दिन, देश में 24-कैरेट सोने की कीमत ₹1,51,470 प्रति 10 ग्राम है, जबकि चांदी की कीमत ₹2,35,070 प्रति किलोग्राम है। वहीं, आज 22-कैरेट सोने की कीमत ₹1,38,848 प्रति 10 ग्राम है।
पिछले महीने, 24-कैरेट सोने की कीमतों में लगभग 3.5% की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि पिछले एक साल में इनमें लगभग 32% की बढ़ोतरी हुई थी। पिछले शुक्रवार को सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई, जबकि उसी दौरान चांदी की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना ₹1,50,700 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,35,000 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।
**आज सोने की कीमतें**
आज, 24-कैरेट सोने की कीमत ₹15,147 प्रति ग्राम, ₹1,51,470 प्रति 10 ग्राम और ₹1,514,700 प्रति 100 ग्राम है।
आज, 22-कैरेट सोने की कीमत ₹13,885 प्रति ग्राम, ₹1,38,848 प्रति 10 ग्राम और ₹1,388,475 प्रति 100 ग्राम है।
आज, 18-कैरेट सोने की कीमत ₹11,360 प्रति ग्राम, ₹113,603 प्रति 10 ग्राम और ₹1,136,025 प्रति 100 ग्राम है। **शहर के हिसाब से कीमतें क्या हैं?** मुंबई – ₹1,51,200 प्रति 10 ग्राम
दिल्ली – ₹1,50,940 प्रति 10 ग्राम
चेन्नई – ₹1,51,640 प्रति 10 ग्राम
हैदराबाद – ₹1,51,440 प्रति 10 ग्राम
कोलकाता – ₹1,51,000 प्रति 10 ग्राम
बेंगलुरु – ₹1,51,320 प्रति 10 ग्राम
इस हफ़्ते ट्रेडिंग का क्या आउटलुक है?
जानकारों का अनुमान है कि इस हफ़्ते सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहेगा। उनके मुताबिक, US के आर्थिक डेटा, वेस्ट एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतें इन कीमती धातुओं की कीमतों पर असर डालेंगी।
2 अक्टूबर (शुक्रवार) को महात्मा गांधी की जयंती के कारण ट्रेडिंग का हफ़्ता छोटा होने की वजह से, बाज़ार का ध्यान कंज्यूमर कॉन्फिडेंस, ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) और पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई से जुड़े US डेटा पर रहेगा। इसके अलावा, यूरोज़ोन की महंगाई, मैन्युफैक्चरिंग PMI, फेडरल रिज़र्व के अधिकारियों के बयान और US के रोज़गार के आंकड़े बाज़ार की दिशा तय करेंगे।
जानकार क्या कहते हैं?
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि बाज़ार US के नॉन-फार्म पेरोल और बेरोज़गारी के आंकड़ों पर कड़ी नज़र रखेगा, जो अक्टूबर में फेडरल रिज़र्व के ब्याज दर के फैसले के बारे में उम्मीदों का अंदाज़ा लगाने के लिए ज़रूरी हैं।
JM फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी और करेंसी रिसर्च) प्रणव मेर ने कहा कि सोने पर दबाव सिर्फ़ करेंसी मार्केट की वजह से नहीं है। US का 10-साल का ट्रेज़री यील्ड 2007 के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच गया है, जबकि 30-साल का यील्ड 2004 के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर के करीब है। ज़्यादा लॉन्ग-टर्म बॉन्ड यील्ड आम तौर पर सोने और चांदी जैसे निवेश विकल्पों की मांग को कम कर देते हैं। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल का बाज़ार भी एक अहम कारक होगा।